अरुणाचल प्रदेश

भाषायें

भारत के अंतिम पूर्वोत्तर छोर पर स्थित अरुणाचल प्रदेश अनेक कारणों से विशेष स्थान रखता है । अरुणाचल प्रदेश के दक्षिण में असम और नागालैंड, पश्चिम में असम और भूटान, उत्तर में चीन और पूरब में म्यांमार स्थित है । ईटानगर अरुणाचल प्रदेश की राजधानी है ।

अरुणाचल का अर्थ है सूरज की पहली किरणों से रंजित होनेवाला पहाड़ । अरुणाचल प्रदेश को भारत का फलोद्यान और वनस्पति विज्ञानियों के लिए स्वर्ग कहा गया है । भूगर्भ विज्ञानं की दृष्टि से यह प्रदेश पूर्वोत्तर भारत का सबसे महत्त्वपूर्ण प्रदेश है । पूर्वोत्तर के अन्य प्रदेशों की तरह यहाँ के अधिकाँश लोग भी तिब्बती-बर्मी मूल के ही हैं ।

अरुणाचल प्रदेश का उल्लेख कालिका पुराण और महाभारत में मिलता है । पुराणों में प्रभु पहाड़ की संज्ञा दी गई है । अरुणाचल प्रदेश के विषय में ऋषि परसुराम और व्यास, राजा भीष्मक, भगवान् श्रीकृष्ण आदि से जुडी पौराणिक कहानियां प्रचलित हैं । पौराणिक विरासत के प्रमाणस्वरूप यहाँ अनेक स्थानों पर पुरातात्त्विक अवशेष विद्यमान हैं ।

अरुणाचल प्रदेश में पर्वतों की ऊंचाई के अनुसार यहाँ के मौसमों और वनस्पतियों एवं वनों के प्रकार में भी भिन्नता देखी जाती है । इसी प्रकार वन्य जीवों के प्रकार में भी उनके निवासस्थान की ऊंचाई का प्रभाव स्पष्ट देखा जा सकता है । बाघ, चीता, बिलाव इत्यादि प्राणियों के प्रकार ऊंचाई के अनुसार भिन्न हैं । हुलॉक गिबन, मॉडरेट लोरिस, असामीज मैकक, लप्पड़ लंगूर आदि की भिन्न प्रजातियां अरुणाचल प्रदेश में पाई जाती हैं ।

भारत में बकरे की तीन प्रजातियां ज्ञात हैं - सेराव, गोराल और टाकिन । इसमें से टाकिन प्रजाति का बकरा केवल अरुणाचल प्रदेश में ही पाया जाता है । खरगोश का रोम सामान्यतः मुलायम होता है, परन्तु कड़े रोम वाला खरगोश भी इस प्रदेश में है । बड़े आकर वाले तृणभोजी वन्य एवं पालतू प्राणियों में गौड़, हाथी, बिशन, गाय इत्यादि के विभिन्न प्रकार यहाँ देखे जा सकते हैं । 

यहाँ पहाड़ों की ऊंची चोटियों पर पाए जानेवाले अन्य जीव-जंतुओं में कस्तूरी हिरन, भराल, हिमालयी भालू, लाल पांडा इत्यादि प्रमुख हैं । कुछ काम ऊंचाई पर पाए जानेवाले जंतुओं में गिलहरी, चूहे, नेवले, लिनसांग, लोमड़ी, चमगादड़ इत्यादि देखे जाते हैं ।
मुर्गाबियों की लगभग 500 प्रजातियां अरुणाचल प्रदेश में पाई जाती हैं । इसके अलावा बतख, स्क्लेटर मोनाल, टैमिनिक ट्रैगोपान, बंगाल फ्लोरिकन इत्यादि पक्षियों की यहाँ भरमार है । मैदान से लेकर बर्फीली चोटियों तक यहाँ पक्षियों की अनूठी प्रजातियां देखने को मिल जाती हैं ।

मौसम के बारे में :
हवा का मौसम : मई से सितम्बर
गर्मियों का मौसम : मार्च से मई (15ºC से 21ºC)
अधिक ऊंचाई पर कड़ाके की ठण्ड

यहां आने का उपयुक्त समय : अक्टूबर से मार्च

यहाँ कैसे पहुंचें :

वायु मार्ग से  : लीलाबादी (उत्तरी लखीमपुर) तक फ्लाइट से । यहाँ आने के लिए तेज़पुर हवाई अड्डे तक भी फ्लाइट से आया जा सकता है । हवाई अड्डों से अन्य वाहनों की सुविधा मिल जाती है ।
रेल मार्ग से : ट्रेन से आने पर हरमुती रेलवे स्टेशन तक आया जा सकता है, जो ईटानगर से 33 किलोमीटर की दूरी पर है । यहाँ से अन्य वाहन मिल जाते हैं ।
सड़क मार्ग से  : ईटानगर से 10 किलोमीटर की दूरी पर नाहरलागुन बस अड्डा है, जहाँ शिलांग, जीरो, बोमडिला, गुवाहाटी, नार्थ लखीमपुर इत्यादि से बस द्वारा आने की सुविधा है ।

Arunachal Pradesh Tourist Spot

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