मणिपुर

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पूर्वोत्तर भारत के अंतिम छोर पर स्थित तथा मणिपुर राज्य पहाड़ियों, घाटियों, झीलों, वनों और  नाना प्रकार के दुर्लभ प्राणियों से भरा एक सुन्दर प्रदेश है, जहां पर्यटन की अपार सुविधाएं और संभावनाएं मौजूद हैं । मणिपुर में निवास करने वाली जनजातियों में मैतेई, नगा, कुकी, मिज़ो, गोरखा इत्यादि प्रमुख हैं । अपने सांस्कृतिक विरासत में भी यह प्रदेश उतना ही संपन्न है।


मणिपुर पुरानी और नयी संस्कृतियों का सुन्दर मिलनस्थल है ।  यहाँ के लोक नृत्यों में मणिपुरी और रास लीला का बड़ा महत्त्व है । रास लीला न केवल भक्ति और प्रेम से सराबोर होता है बल्कि इसकी भाव-भंगिमाएं भी बड़ी लालित्यपूर्ण होती हैं । इसके अलावा अप्रैल-मई में मनाया जानेवाला 'लाय हारोबा' त्यौहार भी यहाँ के जन-जीवन में बड़ा मत्त्व रखता है । यह भी संगीत-नृत्यमय त्यौहार है । नगा जनजाति का त्यौहार लुइन्गाईनि और कुकी चीन मिज़ो जनजाति का त्यौहार कुट भी मणिपुर में बहुत लोकप्रिय है ।  
 

जनसँख्या : ( 2011 ) : 23,88,634
साक्षरता : 68 .87 %
राजकीय भाषा : मणिपुरी
धर्म : वैष्णव हिन्दू
 

मणिपुर का लगभग एक तिहाई भाग पहाड़ियों तथा सदाबहार वनों और जंगलों से भरा हुआ है । इसके अलावा इस प्रदेश में दूर तक फैले बाँसवान और देवदार के पेड़ों की भरमार देखी जा सकती है ।  ज़ुकोउ और सिरोई में तो लगभग 500 प्रकार के अनूठे फल-फूल देनेवाले वृक्ष हैं । यहाँ के वनों में संरक्षित प्राणियों में स्लो लोरिस, हुलॉक गिब्बन, स्पॉटेड लिशंग, फिजांट, ट्रैगोपान, नोंगिन इत्यादि प्राणियों के दर्शन करना किसी उपलब्धि से काम नहीं । इसमें नोंगिन मणिपुर का राजकीय पक्षी है ।

मौसम और वर्षा :
मणिपुर ऊष्णकटिबंधीय मॉनसूनी जलवायु वाला प्रदेश है । गर्मियों में अधिक गर्मी रहती है और जाड़े में अधिक शुष्कता रहती है । गर्मी के दिनों में यहाँ का तापमान  25°C से 32°C  तक होती है ।  अधिकतम वर्षा जिजिबाम में  258.9 से.मी. तथा न्यूनतम वर्षा वांघल में  97 से.मी. होती है । दिसंबर से फरवरी तक जाड़े का, मार्च से मई तक गर्मी रहती है और तथा मई से सितम्बर के बीच वर्षा का मौसम होता है ।
 
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मणिपुर पर्यटन स्थल