मेघालय

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पर्यटन की दृष्टि से मेघालय पूर्वोत्तर भारत का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण राज्य माना जाता है । पर्यटन के के लिए इस राज्य मे अपार संभावनाएं विद्यमान हैं । मेघालय पर्यटन विभाग इस दिशा मे तेजी से प्रयासरत है । विभिन्न पर्यटन स्थलों तक पहुँचने, ठहरने और भ्रमण की मूलभूत सुविधाओं के विस्तार और स्थलों के सौंदर्यीकरण के कार्य चल रहे हैं । प्राकृतिक पर्यटन, सांस्कृतिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन इत्यादि विभिन्न क्षेत्रों मे इस राज्य को आकर्षक बनाए जाने की सभी प्रक्रियाएँ तेजी से विकास पर हैं । इसमे खेल और पर्वतारोहण संस्थाओं की भी मदद ली जा रही है ।
 
मेघालय बांग्लादेश के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमा से जुड़ा हुआ है । यहाँ की राजधानी शिलांग है, जिसे पहले से ही ‘पूरब का स्कॉटलैंड’ कहा जाता रहा है । पहले यह राज्य असम का एक भाग था । 21 जनवरी सन 1972 को ख़ासी, गारो और जयंतिया पहाड़ी जिलों को लेकर यह असम से अलग हो गया । यहाँ की राजकीय भाषा अंग्रेजी है । यह मातृप्रधान राज्य है, जहां स्त्रियॉं के अधिकार अधिक होते हैं । परिवार मे सबसे छोटी पुत्री को संपत्ति का स्वामी होने का अधिकार होता है । वृद्ध माता-पिता की देखभाल का उत्तरदायित्व भी सबसे छोटी पुत्री का ही होता है ।
 
मेघालय मे वर्षा अधिक होती है । वर्षा का वार्षिक औसत मान लगभग 1200 सेंटीमीटर आँका जाता है । इस राज्य की 70% भूमि वनों और जंगलों से भरी हुई है । यहाँ की जलवायु उष्णकटिबंधीय है, जिसके फलस्वरूप यहाँ पर्णपाती और सदाबहार, दोनो प्रकार के पेड़-पौधे तथा मैदानी और पहाड़ी, दोनों प्रकार के जीव-जन्तु पाए जाते हैं ।   
 
इस राज्य मे खाद्यान्न और वाणिज्यिक, दोनों प्रकार की कृषि देखी जाती है । वनों मे कुछ वाणिज्यिक लाभ के पेड़-पौधे भी उपलब्ध हैं । यहाँ के कृषिजात उत्पादों मे आलू, चावल, अनारस, केले, पपीता, मसाले इत्यादि अधिक मात्रा मे उत्पन्न होते हैं । राज्य का सकाल घरेलू उत्पाद भी उत्साहवर्धक देखा गया है । यहाँ यातायात के भी सुविधापूर्ण साधन उपलब्ध हैं । मेघालय मे राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई 1170 किलोमीटर है । बांग्लादेश के साथ भी इसके सीधे व्यापारिक संबंध हैं ।
 
वन और पेड़-पौधे :
मेघालय घने वनों वाला प्रदेश है, जिस कारण यहाँ वर्षा की मात्र बहुत अधिक है । 9,496 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र मे बहुत अधिक पुराने और घने वन हैं, जिन्हें संरक्षित रखना यहाँ के लोगों की धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं मे सम्मिलित है, जिसके फलस्वरूप यहाँ के वनों मे अनेक प्रकार के बहुमूल्य पेड़-पौधे तथा वन्य प्राणी संरक्षित और सुरक्शित हैं । वेस्ट गारो हिल्स मे नोकरेक बायोसफेयर रिज़र्व तथा साउथ गारो हिल्स में बालपकरम नेशनल पार्क मे पाए जानेवाले अनूठे पेड़-पौधे और जीव-जन्तु इसके स्पष्ट उदाहरण हैं । इसके अलावा नोङ्ग्खिलेम, सिजु और बाघमारा अभयारण्यों के उदाहरण भी ले सकते हैं । निपेन्थस खासियाना (पिचर प्लांट) का पाया जाना भी एक बड़ा उदाहरण है ।  
 
मेघालय मे अनेक प्रकार के पशु-पक्षी, सरीसृप और कीड़े-मकोड़े पाए जाते हैं । यहाँ पाए जानेवाले पशुओं मे विभिन्न प्रकार के हाथी, भालू, रेड पांडा, सिवेट, नेवले, वीजेल, गौड़, भैंसा, हिरण, बोर इत्यादि प्रमुख हैं । यहाँ चमगादड़ों की संख्या भी बहुत है । खास तौर पर सिजु की गुफाओं मे चमगादड़ों की भरमार है । इसके अलावा हूलोक गिबन मेघालय के लगभग सभी जिलों मे देखे जा सकते हैं । सरीसृपों मे कछुया, छिपकिली, घड़ियाल इत्यादि की संख्या मेघालय मे पर्याप्त है । साँपों मे अजगर, नाग, कॉपर हैड, हरे रंग वाला ट्री रेसर, कोरल स्नेक, वाइपर इत्यादि अधिक हैं ।
 
मौसम और वर्षा :
गर्मियों के मौसम मे  : 23°C-15°C;  सर्दी के मौसम मे : 15°C-03°C
 
मेघालय मे वर्षा अधिक होती है और मौसम ऊमस से भरा होता है । जाड़े के दिनों मे कुहासा सामान्यतः हर समय घिरा रहता है । 

मेघालय पर्यटन स्थल

Imil-Chang-Dare Falls
Meghalaya, South West Garo Hills
Umlawan Cave
Meghalaya, West Jaintia Hills