त्रिपुरा

भाषायें

त्रिपुर पूर्वोत्तर भारत का एक साफ़-सुथरा, सुन्दर प्रदेश है । बांग्लादेश इसकी सीमा से लगा हुआ है । इस प्रदेश में लगभग 19 प्रकार की जनजातियां रहती है और यहाँ की सामान्य भाषा कोकबोरोक कहलाती है ।

ब्रिटिश शासन का अंग बनने के पहले त्रिपुरी वंश के राजाओं ने इस प्रदेश पर अनेक वर्षों तक शासन किया था । किसी समय इस प्रदेश का नाम कोमिल्ला जिले में स्थित टिप्पेरा पहाड़ी के नाम पर टिप्पेरा प्रदेश हुआ करता था । सन 1949 में इसे भारतीय महाद्वीप का अंग बनाया गया ।

यह प्रदेश घने जंगलों और पहाड़ियों से भरा हुआ है । यहाँ बांस, बेंत और रबड़ की पैदावार अधिक होती है और यही यहाँ के लोगों के व्यवसाय का मुख्य आधार है । इसके अलावा धान की खेती भी इस प्रदेश में अच्छी होती है ।

वन और वन्य प्राणी :

जैव भूगोल की दृष्टि से यह प्रदेश इंडो-मलाया पर्यावरण-क्षेत्र में पड़ता है । यहाँ की पहाड़ियों पर सदाबहार वन पाए जाते हैं । यहाँ पाए जानेवाले पेड़-पौधों में डिप्टेरोकार्पस, आर्टोकार्पस, अमूरा, ईलिओकार्पस, सीजीजियम और  एउगेनिआ जैसी प्रजातियों की बहुतायत है । इसके अलावा साल के वृक्ष भी पाए जाते हैं । गन्ने की खेती भी अच्छी होती है ।

यहाँ स्थित राजबाड़ी नेशनल पार्क, सिपाहीजला अभयारण्य, गुमटी अभयारण्य, रोवा और तृष्णा अभयारण्यों में संरक्षित जंगली भैंसा, हाथी, चीता इत्यादि जीव-जंतु प्रमुख हैं । गुमटी और रुद्रसागर झील के आस-पास सामान्य पक्षियों के अलावा प्रवासी पक्षियों के झुण्ड भी देखे जा सकते हैं ।

मौसम और वर्षा :

गर्मियों का मौसम यहाँ मार्च से मई के बीच रहता है । औसत गर्मी 15ºC  से 34ºC रहती है । वर्षा भी प्रचुर मात्रा में होती है ।  
वर्षा की औसत मात्रा इस प्रदेश में 2024.4 मिलीमीटर आंकी गई है । वर्षा का मौसम जुलाई से सितम्बर तक रहता है ।

त्रिपुरा पर्यटन स्थल

Tripura, West Tripura
Tripura, Unakoti